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| Sunday, 11 August 2013 12:12 |
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने सच्चर आयोग की तीन सिफारिशों को अस्वीकार कर दिया है जिसमें राज्य एवं केन्द्रीय वक्फ परिषद की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित करने के लिए अधिकारियों का नया अखिल भारतीय संवर्ग का सृजन करना शामिल है।
सूचना के अधिकार कानून के तहत अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, समान अवसर आयोग की कार्यप्रणाली एवं संरचना के बारे में अध्ययन के लिए गठित विशेषज्ञ दल ने मार्च 2008 में रिपोर्ट पेश कर दी है और इसके प्रारूप के बारे में विधेयक तैयार करने पर विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों से विचार विमर्श चल रहा है। समान अवसर आयोग के बारे में मंत्रालयों एवं विभागों से प्राप्त टिप्पणियों की जांच की गई और समान अवसर आयोग विधेयक 2013 का संशोधित रूप विधि एवं न्याय मंत्रालय को भेजा गया था। विधि एवं न्याय मंत्रालय ने कुछ टिप्पणियां की है जिसकी जांच की जा रही है। आरटीआई के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, केन्द्र सरकार ने जाति गणना 10 वर्षीय जनगणना कवायद के तौर पर करने और सामाजिक एवं धार्मिक समुदाय के अति पिछड़े लोगों को विश्वविद्यालयों एवं स्वायत्त कालेजों में वैकल्पिक प्रवेश मापदंड का प्रवधान किये जाने की सच्चर समिति की सिफारिश को भी अस्वीकार कर दिया गया है। अरजलों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करना अथवा कम से कम अन्य पिछड़े वर्ग के कोटे में से ही अलग बनाए गए अति पिछड़े वर्ग में शामिल करने की एक सिफारिश पर गृह मंत्रालय अलग से कार्रवाई कर रहा है। आरटीआई के तहत मिली जानकारी के अनुसार, सच्चर समिति की रिपोर्ट के आधार पर 76 सिफारिशें सूचीबद्ध की गई और इनमें से 72 सिफारिशों को संबंधित मंत्रालयों एवं विभागों ने स्वीकृति प्रदान कर दी। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद वक्फ विधेयक 2010 को 27 फरवरी 2013 को राज्यसभा में विचारार्थ पेश किया गया है। सूचना के अधिकार कानून के तहत मुरादाबाद स्थित आरटीआई कार्यकर्ता सलीम बेग ने अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय से सच्चर समिति की सिफारिशों के कार्यान्वयन के बारे में जानकारी मांगी थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय वक्फ विकास निगम की स्थापना सरकार के विचाराधीन है।
सरकार ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम की पुनर्संरचना को सिद्धांत के रूप में अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है । अल्पसंख्यक कार्य सचिव, आरबीआई, नाबार्ड के अधिकारियों की सदस्यता वाली समिति ने एनएमडीएफसी के पुनर्संरचना के प्रस्ताव को अंतिम रूप दे दिया है और ईएफसी ज्ञापन व्यय विभाग को भेजने की तैयार की जा रही है। बहरहाल, अल्पसंख्यक मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अल्पसंख्यकों के लिए अनेक घोषणाओं के बावजूद तीन वर्ष में सरकारी निकायों, बैंकों, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में औसतन करीब 8 प्रतिशत अल्पसंख्यकों को ही नियुक्त किया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक ने अल्पसंख्यक समुदायों को रिण सुविधा प्रदान करने के लिए प्राथमिकता क्षेत्र रिण संबंधी परिपत्र में संशोधन किया है। वर्ष 2012..13 के दौरान अल्पसंख्यकों को 1,85,234 करोड़ रूपये का रिण प्रदान किया गया जो कुल प्राथमिकता क्षेत्र रिण का 14.59 प्रतिशत है। आरटीआई के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, मैट्रिकोत्तर छात्रवृति योजना और स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर के व्यवसासिक तथा तकनीकी पाठ्यक्रमों के लिए मेधा सह साधन आधारित छात्रवृति योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत 2012..13 में अल्पसंख्यक समुदाय के 72.61 लाख विद्यार्थियों को छात्रवृत्तियां प्रदान करने के लिए 1293.95 करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की गई है। मौलाना आजाद शिक्षा प्रतिष्ठान योजना के तहत 2007..08 से अब तक 585 गैर सरकारी संगठनों को शैक्षणिक आधारभूत संरचना के विकास के लिए अनुदान प्रदान किया गया है। मौलाना आजाद फेलोशिप योजना के तहत एमफिल एवं पीएचडी छात्रों के लिए यूजीसी 141 करोड़ रूपये की राशि मंजूर की है। महिलाओं में लघु वित्त रिण को बढ़ावा देने के लिए अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए 6,21,296 खाते खोले गए तथा 2012..13 में इन्हें 4328 करोड़ रूपये का लघु रिण दिया गया। आरटीआई के तहत मिली जानकारी के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अल्पसंख्यक बहुल जिलों में जागरूकता अभियान चला रहे हैं। 2012-13 में 5413 क्षेत्रों में ऐसे 9338 अभियान चलाये गए।
Courtesy- http://www.jansatta.com/
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