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रोशन/एसएनबी नई दिल्ली। देश में सांप्रदायिक सौहार्द बढ़ाने के लिए उर्दू भाषा को मदरसों से बाहर निकाल कर मुख्यधारा के स्कूलों और कॉलेजों में भी एक भाषा के तौर पर पढ़ाई जाए। अल्पसंख्यक बच्चियों में स्कूल में पढ़ने की रुचि जगाने के लिए उन्हें मुफ्त साइकिल दी जाए और हर अल्पसंख्यक बहुल जिले में एक जवाहर नवोदय स्कूल खोला जाए।
योजना आयोग की सदस्य सईदा हामिद की अध्यक्षता में गठित समिति ने ये सुझाव दिए हैं। 12वीं योजना लागू हो गई लेकिन अभी तक उसके अंतिम अध्याय तैयार नहीं हुए है। विभिन्न क्षेत्रों की स्टेयरिंग कमेटियों की रिपोर्ट अभी तैयार नहीं हुई। सामाजिक न्याय और महिला उत्थान के तहत योजना आयोग की सदस्य सईदा हामिद की अध्यक्षता में गठित समिति ने ‘अल्पसंख्यक उत्थान’ नाम से तैयार रिपोर्ट इसी हफ्ते पेश की है।
समिति ने अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए अनेक सुझाव दिए है जिसमें सब्सडी देने से लेकर स्कॉलरशिप का दायरा बढ़ाने तक की सिफारिश की गई है। इनमें सबसे अहम सिफारिश अल्पसंख्यक बच्चियों को लेकर है। अभी मध्यप्रदेश और बिहार में लड़कियों को स्कूल जाने के लिए साइकिल दी जाती है। समिति ने कहा कि अल्पसंख्यक लड़कियां स्कूल बीच में ही छोड़ देती हैं। उनमें स्कूल में पढ़ने का जज्बा पैदा करने के प्रयास किए जाए। इनमें एक उपाय उन्हें मुफ्त साइकिल देना है। इस योजना को केंद्रीय योजना के तहत पूरे देश में लागू की जाए।
दूसरी महत्वपूर्ण सिफारिश है कि उर्दू भाषा को आगे बढ़ाने के लिए उसेमुख्य धारा के स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाया जाए और इसके लिए बड़ी संख्या में उर्दू शिक्षकों की भर्ती की जाए। रिपोर्ट में कहा गया है कि उर्दू हिंदुस्तानी तहजीबी और संस्कृति की भाषा है। इस भाषा में सांप्रदायिक सौहार्द का ताना-बाना बुना हुआ है। समिति ने यह भी कहा कि अल्पसंख्यक बहुल जिलों में एक जवाहर नवोदय स्कूल खोला जाए और वहां 50 फीसद आरक्षण अल्पसंख्यक बच्चों के लिए किया जाए। समिति ने सच्चर आयोग की सिफारिश को भी लागू करने की सिफारिश की है। योजना आयोग की सदस्य सईदा हामिद की अध्यक्षता में गठित समिति ने दिया सुझाव


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